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portada STRIYAN (in Hindi)
Type
Physical Book
Year
2026
Language
Hindi
Pages
348
Format
Paperback
Dimensions
21.60 x 14.00 x 1.90 cm
ISBN13
9789358699487

STRIYAN (in Hindi)

Gayatribala Panda (Author) · PRALEK PRAKASHAN · Paperback

STRIYAN (in Hindi) - GAYATRIBALA PANDA

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Synopsis "STRIYAN (in Hindi)"

गायत्री की कविताओं से गुजरना एक ऐसी जीवंत चित्रावीथि से गुजरना है जो किसी आर्ट गैलरी में समाएगी नहीं ठीक वैसे जैसे राजा रवि वर्मा के चित्रों की प्रतीक्षारत नायिकाएं नहीं समायीं। पर एक तात्त्विक फर्क भी है रवि वर्मा और गायत्री की नायिकाओं में। यह फर्क सिर्फ वर्ग-भेद का नहीं, पुरुष-दृष्टि और स्त्री-दृष्टि का भी है। रवि वर्मा की नायिकाएँ सजी-धजी बैठी हैं, अवसाद में डूबी, एकदम अकेली वे बैठी हैं, हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं और उनकी हथेलियों का गठन ऐसा है कि साफ पता चल जाए, उन्होंने कभी कोई खर भी नहीं टसकाया, आँखों में नीर भरे मौन प्रतीक्षा की है जीवन भर कि कोई आए और यह दुरूह, विजन एकांत गहन तादात्म्य के सामगान से निनादित हो उठे। इसके विपरीत गायत्री की नायिकाएँ, अमृता शेरगिल की नायिकाओं की तरह, झुंड में बैठी हुई लगातार कुछ-कुछ किए जाती हैं, कभी आपस में कुछ-कुछ बोलती-बत्तियाती हुई. कभी गुपचुप कुछ सोचती हुई भी, लेकिन कुल मिलाकर उन्हें सजने-सँवरने का कोई अवकाश नहीं और उनकी इयत्ता कुल मिलाकर एक सामूहिक इयत्ता ही है। जिस सामूहिक इयत्ता की बात मैंने कही, उसी के दम पर "पर्सनल" का विस्तार "पोलिटिकल" तक हो पाता है। सर्वसमावेशी यह निजी इयत्ता ही सामूहिक इयत्ता का ठाठ इतने सहज स्वर में बाँच सकती है। - अनामिका

ओड़िआ भाषा में लिखने वाली महत्वपूर्ण भारतीय कवयित्री गायत्रीबाला पंडा की कविताओं में भारतीय सामाजिक संरचना में स्त्री की वास्तविक अवस्थिति को विन्यस्त करती रही हैं। वे अपने कविताओं में स्त्री की अदम्य जिजीविषा को अविचल ढंग से प्रस्तुत करती है। गायत्रीबाला पंडा स्त्री अस्तित्व के जरूरी प्रश्नों को कहन के नए ढंग में पिरोते हुए 'अस्तित्व के खदबदाने को रेखांकित करने में सफल हुई हैं।

जो लोग सोचते हैं कि स्त्री कविता रोने-धोने की

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The book is written in Hindi.
The binding of this edition is Paperback.

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